24 April 2008

विश्व के मंच की बानी है हिन्दी

ज्ञान समुद्र कबीर-रहीम का, पीती अगस्त्त्य हथेली है हिन्दी
मीरा की प्रेम तरंगिनि अंग के, रंगन संग में खेली है हिन्दी
अनुराग-तड़ाग में फूली-फली, बिकसी जग राम-कहानी है हिन्दी
देश-प्रदेशन साथ चली अब, विश्व के मंच की बानी है हिन्दी ।।
- डा० सर्वदानन्द द्विवेदी